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Delhi Elections: केजरीवाल के एक तिहाई मंत्री हो चुके हैं बागी!

Delhi Elections: दिल्ली सरकार के तीन कार्यकाल में कई नेता बागी हुए, लेकिन इससे पार्टी के सेहत पर कोई खासा असर देखने को नहीं मिला है, लेकिन इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के अब तक के तीन कार्यकाल मिला कर सीएम समेत 18 मंत्री बने हैं, जिनमें छह तो पार्टी से दूर जा चुके हैं. हालांकि, केजरीवाल से दूर जाने वाले ऐसे ज्यादातर नेताओं को अब तक अपेक्षा के मुताबिक राजनीतिक कामयाबी नहीं मिल पाई है.

 

 

 

 

1.कैलाश गहलोत : आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कैलाश गहलोत अब तक के सबसे अनुभवी मंत्री रहे हैं. मंत्रिपरिषद में उनके बराबर अनुभव केवल गोपाल राय के पास है, लेकिन गहलोत के पास हमेशा बड़े और महत्वपूर्ण विभाग रहे.

 

 

 

 

2. राजकुमार आनंद : गहलोत से पहले राजकुमार आनंद ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया था. बीएसपी से नई दिल्ली सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जमानत जब्त हुई. अब बीजेपी में हैं.

 

 

 

 

3. राजेंद्र पाल गौतम : गौतम ने अंबेडकर जी की तरह हिंदू धर्म विरोधी शपथ वाले अपने वीडियो से विवाद में आने के बाद पार्टी के दबाव में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद कुछ महीने पहले कांग्रेस में शामिल हो गए.

 

 

 

 

4. कपिल मिश्रा : केजरीवाल के मंत्रिमंडल से बगावत करने वाला अब तक का सबसे बड़ा नाम हैं कपिल मिश्रा का. केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगा कर बाद में बीजेपी की टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. फिलहाल बीजेपी के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष हैं.

 

 

5. संदीप कुमार : केजरीवाल के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बने संदीप कुमार ने आपत्तिजनक वीडियो बाहर आने पर इस्तीफा दिया था, जो अब बीजेपी में राजनीतिक वजूद तलाश रहे हैं.

 

 

 

6. आसिम अहमद खान : कथित भ्रष्टाचार की शिकायत पर केजरीवाल ने आसिम अहमद खान को कैबिनेट से हटाया था. फिलहाल आसिम राजनीतिक रूप से सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं.

 

 

 

 

 

दिल्ली सरकार का मौजूदा मंत्रिमंडल :–

 

 

  • सीएम – आतिशी
  • मंत्री – गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज, मुकेश अहलवात, इमरान हुसैन

 

 

 

 

पुराने चेहरे :–

 

 

  • पूर्व सीएम– अरविंद केजरीवाल
  • पूर्व डिप्टी सीएम– मनीष सिसोदिया
  • पूर्व मंत्री– सत्येंद्र जैन, गिरीश सोनी, सोमनाथ भारती, राखी बिड़लान, जितेंद्र तोमर

 

 

विधानसभा चुनाव में देखने मिलेगा असर

 

 

 

 

भले ही बागियों से अब तक आम आदमी पार्टी की सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा हो, लेकिन इनकी बढ़ती संख्या से कुछ ही हफ्तों में होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार केजरीवाल की मुश्किलें जरूर बढ़ने वाली हैं.

 

 

 

 

क्या कैलाश गहलोत के आम आदमी पार्टी छोड़ने की वजह आतिशी हैं? केजरीवाल की खामोशी के क्या मायने

 

 

 

 

 

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से कुछ अरसे पहले मंत्री कैलाश गहलोत ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

 

 

 

 

 

क्या कैलाश गहलोत के आम आदमी पार्टी छोड़ने की वजह आतिशी हैं? केजरीवाल की खामोशी के क्या मायने

 

 

 

 

 

 

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से कुछ अरसे पहले मंत्री कैलाश गहलोत ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

 

 

 

 

 

 

दिल्ली के मंत्री कैलाश गहलोत ने रविवार को आम आदमी पार्टी छोड़ दी.

 

 

 

 

 

 

नई दिल्ली:दिल्ली में विधानसभा चुनाव से कुछ अरसे पहले कैलाश गहलोत (Kailash Gehlot) ने आम आदमी पार्टी (AAP) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. कैलाश गहलोत के पार्टी छोड़ने की क्या वजह है? गहलोत के इस्तीफे के लिए ‘आप’ के नेता  बीजेपी को दोष दे रहे हैं. वे कह रहे हैं केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच के दबाव में आकर गहलोत ने पार्टी छोड़ी है. लेकिन क्या वास्तव में यही वजह है, या फिर गहलोत और मुख्यमंत्री आतिशी (Atishi) के बीच महत्वाकांक्षाओं का टकराव इसकी वजह है?

 

 

 

 

आम आदमी पार्टी और कैलाश गहलोत के बीच दरार काफी दिनों से बढ़ती जा रही थी. उनके इस्तीफे की पटकथा पिछले साल दिसंबर में लिखी गई थी जब कैलाश गहलोत से न्याय विभाग लेकर आतिशी को दे दिया गया था. कैलाश गहलोत के करीबी लोग बताते हैं कि तभी यह साफ हो गया था कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का कैलाश गहलोत पर आतिशी के बराबर भरोसा नहीं है. फिर अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के जेल जाने के बाद 15 अगस्त को झंडा फहराने के मुद्दे पर केजरीवाल चाहते थे कि आतिशी झंडा फहराए लेकिन उप राज्यपाल ने कैलाश गहलोत को झंडा फहराने का मौका दिया.  सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कैलाश गहलोत मुख्यमंत्री पद के लिए भी दावेदार थे, जो कि उन्हें न देकर आतिशी को दे दिया गया.

 

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा है कि कैलाश गहलोत बीजेपी की स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं. जबकि कैलाश गहलोत ने अपने पत्र में लिखा है कि यमुना की सफाई और ‘शीशमहल’ के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की साख लगातार गिर रही थी.

 

 

 

 

 

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल गहलोत के इस्तीफे पर खामोश हैं. बीजेपी के पूर्व विधायक अनिल झा के ‘आप’ में स्वागत के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल से गहलोत के अचानक इस्तीफे के बारे में पूछा गया. इस पर उन्होंने तुरंत माइक अपने बगल में बैठे पार्टी के वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक की ओर मोड़ दिया. दुर्गेश पाठक ने कहा कि कैलाश गहलोत से कई महीनों से ईडी और आयकर विभाग पूछताछ कर रहा था और छापेमारी कर रहा था.

 

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जब रिपोर्टर ने उनसे जवाब देने के लिए कहा, तो इससे पहले कि पाठक बोलना शुरू करते केजरीवाल ने मुस्कुराते हुए कहा, “आप जवाब चाहते हैं, है न?” केजरीवाल ने इसके तुरंत बाद बीजेपी की आलोचना की, लेकिन गहलोत के इस्तीफे का जिक्र नहीं किया.

 

गहलोत के पास कोई विकल्प नहीं था : दुर्गेश पाठक

 

 

 

 

 

दुर्गेश पाठक ने कहा कि, ”कैलाश गहलोत से कई महीनों से ईडी और आयकर विभाग पूछताछ कर रहा है और छापेमारी कर रहा है, इसलिए उनके पास कोई विकल्प नहीं था. उन्होंने कहा कि, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि बीजेपी दिल्ली चुनाव हार चुकी है. उनके पास कोई मुद्दा नहीं है. वे ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के दम पर लड़ रहे हैं और हम लोगों के मुद्दों पर लड़ रहे हैं.”

 

 

 

इससे पहले पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि गहलोत का इस्तीफा बीजेपी की “गंदी राजनीति” का हिस्सा है. उन्होंने ‘आप’ के ट्विटर हैंडल से शेयर किए गए वीडियो में कहा, “कैलाश गहलोत पर ईडी-सीबीआई के छापों के जरिए दबाव बनाया जा रहा था और वह बीजेपी की स्क्रिप्ट के मुताबिक बोल रहे हैं. दिल्ली चुनाव से पहले मोदी वॉशिंग मशीन चालू हो गई है. अब इसके जरिए कई नेताओं को बीजेपी में शामिल किया जाएगा.”

 

 

 

 

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विपक्षी दल अक्सर ‘वाशिंग मशीन’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए बीजेपी पर विपक्षी नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच की धमकी देकर पार्टी बदलने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाते रहते हैं. विपक्षी दलों का आरोप है कि ऐसे नेताओं के खिलाफ कोई भी कार्रवाई बीजेपी में शामिल होते ही रोक दी जाती है.

गहलोत का ‘आप’ के भीतर गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा

 

आम आदमी की प्रतिक्रिया गहलोत द्वारा अपने एक्स हैंडल पर अपना इस्तीफा पत्र पोस्ट करने के करीब एक घंटे बाद आई. पार्टी के वरिष्ठ नेता गहलोत गृह और परिवहन जैसे प्रमुख विभागों के प्रभारी थे. उन्होंने केजरीवाल को संबोधित पत्र में ‘आप’ के भीतर गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा किया है.

 

कैलाश गहलोत ने लिखा, “राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं लोगों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता से आगे निकल गई हैं, जिससे कई वादे अधूरे रह गए हैं. उदाहरण के लिए यमुना को ही लें, जिसे हमने स्वच्छ नदी में बदलने का वादा किया था, लेकिन ऐसा कभी नहीं हो सका. अब यमुना नदी शायद पहले से भी अधिक प्रदूषित हो गई है.”

 

गहलोत ने केजरीवाल पर साफ तौर पर से निशाना साधते हुए “शीशमहल” जैसे कई शर्मनाक और अजीब विवादों का उल्लेख किया है. शीशमहल शब्द का इस्तेमाल बीजेपी केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान रिनोवेट किए गए मुख्यमंत्री आवास के लिए करती है. गहलोत ने कहा है कि इस तरह के विवाद “अब सभी को संदेह में डाल रहे हैं कि क्या हम अभी भी आम आदमी होने में विश्वास करते हैं.”

 

दिल्ली के लोगों को बुनियादी सेवाएं देने की क्षमता पंगु हुई

 

गहलोत ने कहा कि, ”आम आदमी पार्टी अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए लड़ रही है और इसने दिल्ली के लोगों को बुनियादी सेवाएं देने की हमारी क्षमता को भी बुरी तरह से पंगु बना दिया है.” उन्होंने कहा, “अब यह स्पष्ट है कि अगर दिल्ली सरकार अपना अधिकांश समय केंद्र से लड़ने में बिताती है तो दिल्ली की वास्तविक प्रगति नहीं हो सकती.”

गहलोत ने अंत में लिखा है कि, “मैंने अपनी राजनीतिक यात्रा दिल्ली के लोगों की सेवा करने की प्रतिबद्धता के साथ शुरू की थी और मैं इसे जारी रखना चाहता हूं. यही कारण है कि मेरे पास ‘आप’ से अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा और इसलिए मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं. मैं आपके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं.”

पेशे से वकील कैलाश गहलोत नजफगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं. वे 2015 से कैबिनेट मंत्री हैं. पिछले साल भ्रष्टाचार के एक मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने महत्वपूर्ण वित्त विभाग भी संभाला था.

चुनाव से पहले AAP को झटका, मंत्री कैलाश गहलोत ने दिया इस्तीफा, बोले- अब कोई ऑप्शन नहीं बचा

दिल्ली में अब विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं है, लेकिन चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है.

 

 

चुनाव से पहले AAP को झटका, मंत्री कैलाश गहलोत ने दिया इस्तीफा, बोले- अब कोई ऑप्शन नहीं बचा
कैलाश गहलोत

नई दिल्ली:दिल्ली सरकार के मंत्री कैलाश गहलोत ने पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे में केजरीवाल को लिखा कि सबसे पहले मैं आपको एक विधायक और एक मंत्री के रूप में दिल्ली के लोगों की सेवा और प्रतिनिधित्व करने का सम्मान देने के लिए ईमानदारी से धन्यवाद देना चाहता हूं. लेकिन साथ ही मैं यह भी बताना चाहता हूं कि आज आम आदमी पार्टी के सामने गंभीर चुनौतियां हैं. चुनौतियां पार्टी के भीतर से हैं, उन्हीं मूल्यों से जुड़ी हैं, जिनके कारण हम आम आदमी पार्टी में आए हैं. राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं लोगों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पर हावी हो गई हैं, जिससे कई वादे छूट गए हैं.

हम राजनीतिक एजेंडे के लिए लड़ रहे हैं…

 

गहलोत ने आगे लिखा कि यमुना नदी को ही ले लीजिए, जिसे हमने स्वच्छ नदी बनाने का वादा किया था, लेकिन कभी पूरा नहीं कर पाए. अब यमुना नदी शायद पहले से भी ज़्यादा प्रदूषित हो गई है. इसके अलावा, अब कई शर्मनाक मामले सामने आ रहे हैं. ‘शीशमहल’ जैसे अजीबोगरीब विवाद, जो अब सभी को संदेह में डाल रहे हैं कि क्या हम अभी भी आम आदमी होने में विश्वास करते हैं. एक और दर्दनाक बात यह है कि लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय हम केवल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए लड़ रहे हैं.

 

 

AAP से अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं

 

इससे दिल्ली के लोगों को बुनियादी सेवाएं देने की हमारी क्षमता भी बुरी तरह से कम हो गई है. अब यह स्पष्ट है कि अगर दिल्ली सरकार अपना अधिकांश समय केंद्र से लड़ने में बिताती है तो दिल्ली की तरक्की नहीं हो सकती. मैंने अपनी राजनीतिक यात्रा दिल्ली के लोगों की सेवा करने की प्रतिबद्धता के साथ शुरू की थी और मैं इसे जारी रखना चाहता हूं. इसलिए, मेरे पास AAP से अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है और इसलिए मैं आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं.

गहलोत के इस्तीफे पर बीजेपी की प्रतिक्रिया

 

कैलाश गहलोत के इस्तीफे और पार्टी छोड़ने पर बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस्तीफा देकर बताया कि आप किस तरह से आम से खास पार्टी बन चुकी है. उसका सियासी धर्मांतरण हो चुका है, सब मूल्यों से हट चुकी है. जो वादे किए, सारे वादे तोड़ दिए. वादे करने वाले शीशमहल में व्यस्त हो गए. अन्ना हजारे भी आप और केजरीवाल के बारे में ऐसी ही बातें कह चुके हैं. योगेंद्र यादव और कुमार विश्वास ने भी ऐसी ही बातें कही. आप केवल अरविंद आदमी पार्टी बन चुकी है.

 

कैलाश गहलोत के इस्तीफे पर AAP सूत्रों ने जवाब दिया है कि उन पर ED और इनकम टैक्स के कई मामले लंबित थे. कैलाश गहलोत पर ED और इनकम टैक्स के कई छापे पड़े. उनके पास BJP में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. यह BJP की साजिश है. BJP ED और CBI के दम पर दिल्ली चुनाव जीतना चाहती है.

 

बीजेपी कैलाश गहलोत के स्वागत को तैयार

 

बीजेपी ने कैलाश गहलोत को बधाई दी है. वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा की प्रतिक्रिया भी आई है. उन्होंने कहा कि शीशमहल और यमुना सफ़ाई के जिन मुद्दों को बीजेपी ने उठाया था, उन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर कैलाश गहलोत ने इस्तीफ़ा दिया. बताया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी और कैलाश गहलोत के बीच दरार की बुनियाद 15 अगस्त को पड़ी. जब दिल्ली के उपराज्यपाल के निर्देश पर मंत्री कैलाश गहलोत ने झंडारोहण किया. जब‍कि अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि आतिशी झंडारोहण करें. बीजेपी नेता सचदेवा ने कहा कि अगर कैलाश गहलोत बीजेपी में शामिल होंगे तो पार्टी उनका स्वागत करेगी.

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